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उत्तराखंड (Uttarakhand) बचाओ संघर्ष समिति ने बेरीनाग तहसील के मनगढ़ और आसपास की 11 खड़िया खनन माइंस की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराने की मांग की है। समिति का आरोप है कि इन माइंस में अवैज्ञानिक तरीके से खनन हो रहा है, जिससे क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति और भी कमजोर हो रही है। राज्य संयोजक जगत मर्तोलिया ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि खनन के लाइसेंस नियमों के खिलाफ जारी किए गए हैं, जिससे भविष्य में आपदाओं की संभावना बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री को भेजा पत्र: खनन के अवैज्ञानिक तरीकों का आरोप
समिति के अनुसार, गंगोलीहाट और बेरीनाग क्षेत्र में भूगर्भीय कमजोरी के बावजूद खनन की गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने उत्तराखंड (Uttarakhand) पुलिस और प्रशासन पर समय-समय पर खनन क्षेत्रों की निष्पक्ष निगरानी न करने का भी आरोप लगाया। खनन के बाद गड्ढे नहीं भरे जाने से बरसात के मौसम में गड्ढों में पानी भरकर गांवों और घरों को नुकसान पहुंचा रहा है।
महापंचायत की तैयारी
समिति ने घोषणा की कि जल्द ही बेरीनाग में अवैज्ञानिक खनन के खिलाफ महापंचायत आयोजित की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में जांच की घोषणा नहीं की, तो इसे राज्य सरकार की मिलीभगत माना जाएगा।
समिति का कहना है कि राज्य की जनता को इन खनन गतिविधियों के खिलाफ सड़क पर उतरना होगा, जैसे राज्य आंदोलन में हुआ था, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।