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नई दिल्ली,
भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने संसद में आम नागरिकों के लिए निजी अस्पतालों और डॉक्टरों द्वारा महंगे इलाज का मुद्दा विशेष उल्लेख (स्पेशल मेनशन) के तहत उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान निजी क्षेत्र के अस्पतालों में इलाज की दरों में भारी असमानता और आम जनता पर इसके आर्थिक प्रभाव की ओर आकृष्ट किया।
महंगे इलाज से बिगड़ रही आमजन की आर्थिक स्थिति
डॉ. बंसल ने कहा कि निजी अस्पतालों में इलाज की दरें मनमाने तरीके से तय की जाती हैं और इस पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है। उन्होंने बताया कि महंगे इलाज के कारण मरीजों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है। “निजी अस्पतालों की दरें तय न होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए मनमानी राशि चुकानी पड़ती है,” उन्होंने कहा।
आयुष्मान योजना को बताया ‘मील का पत्थर’
डॉ. बंसल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू की गई आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने गरीबों को बेहतर इलाज का अवसर प्रदान किया है। उत्तराखंड में डबल इंजन सरकार के तहत सभी नागरिकों को इस योजना का लाभ मिल रहा है, जिसमें 5 लाख रुपये तक का इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
सरकार से निजी अस्पतालों की दरें तय करने की मांग
डॉ. बंसल ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार मेडिक्लेम कंपनियां और सीजीएचएस (केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना) निजी अस्पतालों से सस्ती दरों पर इलाज के लिए समझौता करती हैं, उसी प्रकार सरकार को भी निजी अस्पतालों की दरें तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दरें तय होने से आम नागरिक भी सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।
सरकार से अपील
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि निजी अस्पतालों में सभी उपचार और प्रक्रियाओं की दरें तय करने के लिए नीति बनाई जाए। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।
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डॉ. बंसल ने कहा कि महंगे इलाज का बोझ कम करने के लिए यह कदम अत्यंत जरूरी है और इससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।
–Crime Patrol