हरिद्वार, 15 नवम्बर: तीर्थनगरी हरिद्वार में गुरु नानक देव जी की 555वीं जयंती का भव्य आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर गुरूद्वारा गुरूसिंह सभा और सेक्टर-2 गुरूद्वारे में समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सिख संगत और समाज के विभिन्न वर्गों ने श्रद्धापूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम में गुरू ग्रंथ साहिब के पाठ, कीर्तन और लंगर प्रसाद का वितरण किया गया।
पूर्व मंत्री मदन कौशिक ने दिए गुरु नानक देव जी के आदर्शों को अपनाने के संदेश
समारोह के दौरान पूर्व मंत्री और नगर विधायक मदन कौशिक ने गुरु नानक देव जी के सिखाए स्नेह, संयम, समन्वय और सदाचार के आदर्शों को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरु नानक जी ने अपने जीवन और तीर्थ यात्राओं के माध्यम से लोगों को धर्म के वास्तविक अर्थ को समझाया और समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, गुरु जी ने सदैव मानव सेवा को ही सच्ची ईश्वर सेवा माना और लोगों को आपसी प्रेम और एकता का संदेश दिया।
विधायक आदेश चौहान ने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को सराहा
विधायक आदेश चौहान ने अपने सम्बोधन में कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने सभी को ईश्वर की आराधना और सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। चौहान ने कहा कि गुरु नानक देव जी के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए ही सिख समाज आज भी दुनिया भर में सेवा कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
भव्य स्वागत और दीपदान का आयोजन
इस अवसर पर, नगर विधायक मदन कौशिक को सिख समाज की ओर से पगड़ी पहनाकर और सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। शाम को गुरूद्वारों पर दीपदान और आतिशबाजी का भी आयोजन किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में उल्लास का माहौल छा गया।
प्रमुख उपस्थित जनों में भाजपा नेता और सिख समाज के सदस्य
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरदार हरदीप सिंह, सरदार अजीत सिंह, सरदार हर्षवर्द्धन, सरदार हरमोहन बबली, और सरदार मनमोहन सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा भाजपा नेता संजय चोपड़ा, अनिरुद्ध भाटी, भोला शर्मा और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की।
सेवा और समर्पण का प्रतीक है सिख समाज की लंगर सेवा
सिख संगत ने इस अवसर पर लंगर सेवा के माध्यम से समाज में सेवा परंपरा का पालन करते हुए गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का अनुसरण किया। सभी धर्मों के लोगों ने इस लंगर में प्रसाद ग्रहण किया, जो आपसी भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है।
समारोह के समापन पर सभी ने गुरु नानक देव जी के सिद्धांतों को अपनाते हुए समाज में शांति, समन्वय और प्रेम को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।