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क्राइम पेट्रोल: उत्तराखण्ड के अपर पुलिस महानिदेशक, श्री वी0 मुरूगेशन ने एसटीएफ उत्तराखण्ड और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून व पंतनगर में लम्बित अभियोगों की समीक्षा की। इस समीक्षा के दौरान उन्होंने विवेचनाओं में तेजी लाने और अभियुक्तों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई करने के साथ-साथ पीड़ितों की धनराशि की रिकवरी को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हाल ही में डिजीटल अरेस्ट के नाम पर धोखाधड़ी करने की कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सूचना के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर लगभग 2 करोड़ 30 लाख रुपये पीड़ितों को वापस कराए गए। इसके अलावा, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप, के माध्यम से धोखाधड़ी की गई, जिससे 51 लाख रुपये की रिकवरी की गई।
अपर पुलिस महानिदेशक ने डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग और अन्य फर्जी साइटों के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए भी एसटीएफ को निर्देशित किया।
साथ ही, लम्बित विवेचनाओं के संबंध में विवेचक और पर्यवेक्षण अधिकारियों को मनी ट्रेल के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर शीघ्र वैधानिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके तहत CCTNS, Cri-MAC, NATGRID, FENEX, JMIS, और ICJS पोर्टलों से तकनीकी सहयोग प्राप्त कर अभियुक्तों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी, जिससे साइबर अपराधों पर काबू पाया जा सके।